मेहनत का फल
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में गोपाल नाम का एक गरीब किसान रहता था। वह बहुत मेहनती और ईमानदार था। गोपाल के पास थोड़ी सी ज़मीन थी, जिस पर वह खेती करता था, लेकिन उसकी फसल अक्सर अच्छी नहीं होती थी। फिर भी, वह कभी हार नहीं मानता और रोज़ अपनी पूरी मेहनत से खेत में काम करता था।
एक साल गाँव में बहुत सूखा पड़ा। आसमान में बादल तो आते, पर बारिश की एक भी बूँद नहीं गिरती। गाँव के सारे किसान परेशान हो गए और उन्होंने खेती करना बंद कर दिया। लेकिन गोपाल ने हार नहीं मानी। वह हर दिन सूरज के उगने से पहले उठता, अपने खेत में जाता और कड़ी मेहनत करता। वह सोचता था, "भगवान मेरी मेहनत का फल ज़रूर देंगे।"
दिन, महीने बीतते गए और आखिरकार एक दिन, आसमान में काले बादल छा गए। ज़ोरदार बारिश हुई और गोपाल की मेहनत रंग लाई। उसके खेत में लहलहाती फसलें उग आईं। गाँव के बाकी लोग, जिन्होंने खेती करना छोड़ दिया था, खाली हाथ रह गए। लेकिन गोपाल की मेहनत और धैर्य ने उसे इस कठिन समय में भी सफलता दिलाई।
जब फसल तैयार हुई, तो गोपाल ने उसे बाज़ार में बेचा और बहुत सारा धन कमाया। अब वह गरीब नहीं रहा, बल्कि गाँव के सबसे सफल किसान बन गया। लोग उससे प्रेरणा लेने लगे और समझ गए कि मेहनत का फल कभी न कभी ज़रूर मिलता है।
कहानी का संदेश - यह है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत करने वाले लोग कभी हारते नहीं हैं। मेहनत का फल देर से सही, लेकिन हमेशा मीठा होता है।