सपना वो नाजुक धागा है,
जो रातों को बुनता है,
कभी हंसाता, कभी रुलाता,
नए संसार को चुनता है।
आँखों में जो छवि बसाए,
हर सुबह उसे जगाए,
उम्मीदों के वो पंख लगाकर,
आसमान तक उड़ान कराए।
सपने में हैं छिपे अरमान,
जिन्हें छूने का है सबको गुमान,
कुछ अधूरे, कुछ पूरे से,
पर हर एक में बसा है जहान।
सपना टूटे तो दिल भी दुखता,
पर फिर भी न हार मानता,
क्योंकि ये तो वही सपना है,
जो हर रात फिर से लौट आता।
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